भूतकाल के बंधन तोड़ना सीखें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : अक्सर हम बीती बातों पर ही सोचते रहते हैं, उन्हीं में रमते रहते हैं। यही भूतकाल हमें अपनी गर्त में खींच लेता है। ऐसा करने से भविष्य में हम क्या करेंगे, इसका विचार करने की क्षमता शेष नहीं रहती। भूतकाल में उलझने के बजाय भविष्य में क्या कर सकते हैं, … Read more