आचार्य आनंदऋषिजी थे अजातशत्रु : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : “श्री आनंदऋषिजी गुरुदेव पूज्य क्यों बने? क्योंकि वे अखंडता के उपासक थे। एक-एक व्यक्ति को जोड़ते जाना ही उनका मुख्य कार्य था। आचार्य आनंदऋषिजी वास्तव में अजातशत्रु थे,” ऐसा भावपूर्ण प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया। परिवर्तन चातुर्मास 2025 के अंतर्गत आयोजित ‘आनंदगाथा’ प्रवचनमाला में उन्होंने बताया कि … Read more