असंभव भी संभव होगा – यही विश्वास रखें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : भगवान महावीर अपनी शिक्षा की शुरुआत हमारे स्वप्नों से करते हैं। स्वप्न अर्थात मनोरथ। कुछ स्वप्न हमारे अतीत से आते हैं, वे हमें दिखाई देते हैं, हम उन्हें देखते नहीं। भगवान महावीर कहते हैं – स्वयं स्वप्न देखना सीखो। आज जो संभव है, वहीं से शुरुआत करो। आज यदि एक … Read more