अपनी शक्ति को पंडित बनाइए : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारे भीतर जो शक्ति है, उसमें स्वयं कोई बुद्धि नहीं होती। उसे पंडित बनाना, यही हमारे जीवन का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है, ऐसा प्रतिपादन पू. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर शक्ति के दो प्रकार होते हैं। एक शक्ति सचेत रूप से कार्य करती … Read more