धर्म के अनुसार आचरण महत्त्वपूर्ण : प. पू. प्रवीण ऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : समाज व्यवस्था में परंपराओं का इतना अधिक महिमामंडन किया गया है कि समाज का भयभीत या असहाय चेहरा लगातार दिखाई देता है, और यही उचित है ऐसा मानकर हम भी उसी डर में जीते रहते हैं। जबकि यह भय स्वाभाविक नहीं है, बल्कि समाज व्यवस्था ने रूढ़ियों और परंपराओं के … Read more