अपना ध्यान शुद्ध और निर्मल रखें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारे चलने का जो आधार है, वह ध्यान शुद्ध और निर्मल होना चाहिए। अपने भीतर विचारों की स्पष्टता और दूरदृष्टि होनी चाहिए, ताकि यह भान बना रहे कि हम अंधकार में चल रहे हैं या प्रकाश में। ऐसा वक्तव्य परिवर्तन चातुर्मास २०२५ के अंतर्गत आयोजित प्रवचन माला में प. पू. … Read more