स्वयं को भीतर से पहचानें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म.सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हम भीतर से कैसे हैं, हम स्वयं क्या करते हैं और हमारे द्वारा कौन क्या करवाता है, इन तीन बातों पर हमारा जीवन निर्मित होता है। हम क्या करते हैं या हमारे द्वारा कौन क्या करवाता है, इसकी अपेक्षा हम भीतर से कैसे हैं, यह अधिक महत्त्वपूर्ण है। अर्थात हमारे … Read more