धर्मजागरण ही जीवन का उद्देश्य : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : धर्मजागरण हमारा उद्देश्य है या पाप को बढ़ाना यह प्रश्न स्वयं से अवश्य पूछना चाहिए। हर समय हमारे सामने सकारात्मक और नकारात्मक संभावनाएँ होती हैं। हमारी वाणी का जल हम किस बीज को देते हैं, यह चयन हमारे हाथ में होता है। जीवन में धर्मजागरण को ही लक्ष्य बनाकर आगे … Read more