धर्म बहते जल के समान होना चाहिए : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : जो शत्रु को मित्र बना दे, वही धर्म होता है। जो संकट को संपत्ति में बदल दे, वही धर्म होता है। जो काँटों को फूलों में परिवर्तित कर दे, वही धर्म होता है। इसलिए धर्म बहते हुए जल के समान होना चाहिए निर्मल, स्वच्छ, सबको समाहित करने वाली नदी या … Read more