वाणी रूपी सामर्थ्य का नियंत्रण ज़रूरी : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : विचारपूर्वक बोलना यानी अपने भीतर और अपने विचारों में परिपक्वता सिद्ध करना है। इसलिए हमें मिली हुई वाणी रूपी शक्ति का नियंत्रण हमारे ही हाथ में होना चाहिए। जैसा आप बोएंगे, वैसा ही उगेगा यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए, ऐसा प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया। परिवर्तन … Read more