स्वयं में श्रद्धा और भक्ति का अनुभव करो : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : जिन आराध्य गुरुदेव आचार्य भगवंत को आपने दो हाथों से नमस्कार किया, उन्हीं गुरुदेव ने आपको आठ दिन, नौ दिन, ग्यारह दिन हज़ारों हाथों से संभाला। कल्पना कीजिए, अगर उन्होंने यह सामर्थ्य न दी होती, यह शक्ति न दी होती, तो आज यह आराधना आपसे हो ही नहीं पाती। इसलिए … Read more