शरीर को बनाएं धर्म का मंदिर : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : आप अपने शरीर को भोग का केंद्र बना सकते हैं या रोग का भी केंद्र बना सकते हैं। हमें अपनी शक्ति को शरीर को धर्म का केंद्र बनाने में लगाना चाहिए। एक बार जब शरीर धर्म का मंदिर बन जाता है, तो मन अपने-आप वहीं स्थिर हो जाता है, इधर-उधर … Read more