अंतरमन की प्रज्ञा को जागृत करें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : यदि हमें कोई चीज़ प्राप्त करनी हो, तो हम उसी का ध्यान लगाते हैं। उसे पाने के लिए हम अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह शारीरिक शक्ति सदा समान रहती है या धीरे-धीरे घटती जाती है? जैसे युवावस्था में जो शक्ति … Read more