स्मृतियों का विसर्जन कर भविष्य का निर्माण करें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : भूतकाल का कोई भी प्रभाव हम पर नहीं पड़ना चाहिए। जब तक हम स्मृतियों के प्रभाव में रहते हैं, तब तक हमारा भविष्य उसी के अधीन रहता है। इसलिए केवल विस्मरण (भूल जाना) पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें स्मृतियों का विसर्जन करना होगा। भविष्य की एक स्पष्ट छवि हमारे मन … Read more